रक्तदाता संजीवनी के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह चौहान द्वारा ब्लड बैंक पर जोर दिया गया….

खरोरा:—— नगर की बढ़ती आबादी व आज की परिवेश में रक्त की आवश्यकता शहर में ब्लड बैंक की सार्वजनिक तौर पर जरूरतो पर विशेष बल दे रही है । कहने को तो नगर के गिने चुने निजी हास्पीटलो में ब्लड बैंक की सुविधा है परन्तु इसका लाभ क्षेत्र के अंतीम ब्यक्ति तक पहुंच नहीं पाता । कहने का तात्पर्य यह है कि गरीब तबके मरीजों व उनके परिजन आर्थिक कमजोरी के चलते सीधे निजी हास्पीटलो के ब्लड बैंक से लाभ हासिल करने से वंचित रहता है । चुंकि जानकारी में आया है कि ब्लड बैंक से सुविधायुक्त हास्पीटलो में अमीरी गरीबी की नाप तौल की जाती है । नतीजतन आर्थिक रूप से कमजोर मरीज के परिजनों को ब्लड बैंक की सुविधा मुहैया कराये जाने के बजाय यूनिट की आपूर्ति में कमी का हवाला देकर रक्त दाताओं का चक्कर काटने के लिए मजबूर कर दिया जाता है ।
“”इस मामले पर संजीवनी रक्त दाता संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह चौहान ने गंभीरता जताते हुए कहा कि संजीवनी रक्त दाता संघ सहित क्षेत्र के अनेक संगठनो से आये दिन शहर के ब्लड बैंकों में रक्त की आपूर्ति की जाती है फिर भी सुनने में आता है कि नगर के कुछ ब्लड बैंक से सुविधायुक्त हास्पटीलो में में मरीज के परिजनों को ब्लड के मामले में अधिकतर बाहर का रास्ता दिखाया जाता है जो की उचित नहीं है । उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक के मांग के प्रतिकुल निजी हास्पीटलो में गिनती के ब्लड बैंक की सुविधा होने से कुछ हास्पीटलो की मनमानी बढ़ गई है तथा ब्लड की अनाप शनाप किमते लगायी जाती है।”””
पचास हजार की आबादी पार कर चुकी तिल्दा-नेवरा शहर अभी भी सामुदायिक रूप से ब्लड बैंक जैसे सुविधा का मोहताज है जिनके संबंध में न ही यहां के जनप्रतिनिधि आतुर है और न ही संबंधित सामुदायिक हास्पीटल के गठित समिति तत्पर है । लिहाजा मरीजों को समय में ब्लड की आवश्यकता की अनापूर्ति के चलते असमय मौत का शिकार होना पड़ रहा है या फिर मरीजों के परिजनों की आर्थिक ढाचा प्रभावित हो रहा है ।
ब्लड बैंक की असुविधा को लेकर चौहान का कहना है कि मरीज के परिजन रक्तदान से जुड़े संगठनों के ऊपर अधिकतर आश्रित रहते हैं। उन्होंने बताया कि ब्लड की आवश्यकता की पूर्ति के लिए बलौदाबाजर, सिमगा, भाटापारा, जैसे सुदूर क्षेत्रों का भी मरीज के परिजनों को भटकना पड़ता है ।
कहा जावे तो मरीजों में 80 फिसदी मरीजों को ब्लड की आवश्यकता आन पड़ती है इनमें से असुविधा के चलते अधिकांश मरीज मौत के शिकार हो जाते हैं । फिर भी स्थानीय शासन प्रशासन को सुध नहीं है ।
संजीवनी रक्त दाता संघ जो वर्षों से रक्तदान कर लोगों के जीवन बचाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हुए मार्ग प्रशस्त करते आ रही है उनका भी एक मकसद है कि नगर व क्षेत्र में ब्लड की कमी की वजह से लोगों कोअपनी जान न गंवानी पड़े इसी उद्देश्य को लेकर तात्कालीन मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के शासन काल में समाचार पत्र एवं मुख्यमंत्री के नाम संजीवनी रक्त दाता संघ ने विज्ञापन प्रेषित कर तिल्दा-नेवरा नगर में ब्लड बैंक की मांग की थी और यह मांग उनकी अनवरत जारी है ।
खरोरा से लालजी वर्मा की रिपोर्ट…..



