जहां सम्मान न मिले वहां कभी नहीं जाना चाहिए : पंडित रमाकांत दुबे

खरोरा। जीवन में चाहे कितनी भी दुख और तकलीफ आ जाए। इंसान को कभी भी हिम्मत नहीं हारना चाहिए। धैर्य और संयम ही व्यक्ति को महान बनाता है। इसलिए हर तकलीफों का धैर्यता के साथ सामना करना चाहिए। क्योंकि धैर्य रखने वालों की ईश्वर भी मदद करता है। उक्त उदगार कथावाचक पंडित रमाकांत दुबे खौना वालें की है। ग्राम गैतरा में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा प्रसंग में कथावाचक ने ब्यास पीठ से कपिल जन्म, सती कथा और ध्रुव चरित्र की कथा विस्तार से बताया तो भक्त भावविभोर हो गए। वहीं चौथें दिन अजामिल कथा, समुद्र मंथन और वामन अवतार की कथा का रसपान कराया गया। कथा प्रसंग में भगवताचार्य ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। इसलिए जहां सम्मान न मिले वहां कदापि नही जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सौतेली मां से अपमानित होकर बालक ध्रुव कठोर तपस्या के लिए जंगल को चल पड़े। बारिश, आंधी-तूफान के बावजूद तपस्या से न डिगने पर भगवान प्रगट हुए और उन्हें अटल पदवी प्रदान की। बता दें कि 9 दिसंबर से 17 दिसंबर तक आयोजित हो रहे भागवत कथा का रसपान करने गांव सहित आसपास गांव से भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोतागण पहुंच रहे है। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित हो रहा है। कथा के परायणकर्ता पंडित रविकुमार दुबे खौना वालें है।
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