आगामी विधानसभा चुनाव के हार की आहट से मोदी की तीन कृषि बिल वापसी का फैसला-गामेंद्र नेताम

राजनांदगांव, तीन कृषि बिल वापसी के लिये लगभग 1 साल से दिल्ली की सीमा में किसान अपनी हक कि लड़ाई लड़ रहे थे। पीएम मोदी जी के बिल वापसी की घोषणा निश्चित रूप से किसानों भाइयों की बड़ी जीत हैं।संख्या चाहे कम क्यो न हो पट एकजुटता ही सफलता का कारण माना जाता है।आंदोलन में शहीद होने वाला एक -एक किसान प्रणम्य है। लगभग 700 किसान इस दौरान अपने प्राणो की आहुति दी हैं। जो कि मोदी सरकार के लिए निन्दनीय हैं। अहंकारी, निर्दयी हिटलर शाही सरकार है। किसानों ने अपने घर बार छोड़कर धरती माता को पूंजीपतियों के चँगुल से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। किसान एकता के आगे घमंड से चूर तानाशाह मोदी सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा। आजादी के बाद शायद ऐसा आंदोलन न हुआ हो।
उक्त बातें पार्षद (कनिष्ठ सभापति) व आदिवासी कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष गामेंद्र नेताम ने कहा । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल की सरकार की योजना किसान भाइयों को संजीवनी (टॉनिक )देने का काम कर रहीं हैं। किसान आर्थिक रूप से समृद्ध और खुशहाल है। देश की पहली भूपेश सरकार है। जिन्होंने 2500 रुपये में धान खरीदी कर मानो मोदी सरकार की जड़ें हिला दी है। श्री भूपेश बघेल की सरकार के द्वारा आगामी वर्षो में 2800 रूपया में धान खरीदी की घोषणा से एवँ भूमिहीन खेतिहर मजदूर न्याय 6000 हजार प्रतिवर्ष योजना से मोदी सरकार चारो खानों चीत हो गई है। जिसके चलते तीन कृषि कानून बिल वापस लेने की घोषणा करना पड़ा । पूरे हिंदुस्तान में भूपेश बघेल सरकार की योजना से देश दुनिया के लोग आकर्षित हो रहे है। किसान आंदोलन में शामिल सभी किसान संगठन एवँ देश के सभी राजनीतिक दल जो किसान भाइयो के दर्द को समझकर आंदोलन को सहयोग दिया। वह सभी साधुवाद के पात्र हैं। इस मोदी सरकार के तीन कृषि बिल वापस लेने से ऐसा प्रतीत हो रहा है। कि बैल कितना भी अड़ियल हो किसान चाहे तो एक न एक दिन खेत जुतवा ही लेता हैं।आप सभी को किसानों की भव्य जीत की शुभकामनाएं। जय जवान जय किसान।
देवेन्द्र डोंगर गांव की रिपोर्ट—–




