किसानों के द्वारा कई बार ऑफिस के चक्कर लगा ने के बाद भी नहीं हुआ निराकरण..


- जनपद पंचायत बकावंड के ग्राम पंचायत बनियागांव में विगत दिवस कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड के द्वारा वैज्ञानिकों द्वारा फसल प्रदर्शन लगाया गया था जिसमे किसानों को दिए गए धान बीज 160 दिन का होना बताकर किसानों को वितरण किया गया था फसल जबकि मात्र 50 दिन में ही फसल में बाली निकलना चालू हो गया था इस संबंध में संबंधित विभाग को बताया गया कृषि वैज्ञानिक डॉ. एल. एस. नाग को संपर्क करने पर उन्होंने जांच किया हुआ प्रतिवेदन हमें दिया, जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि इंदिरा बारानी धान जो कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड, के द्वारा कृषि विभाग के आर.ई.ओ. को माध्यम बनाकर यह बीज वितरण किया गया था और कहा गया था कि 160 दिन का धान कहकर वितरण किया गया था परन्तु यह धान 50 दिन में ही बाली आना शुरू हो गया रोपा होने के 15 दिन बाद बाली आना चालू हो जाने से किसानों की चिंता और बढ़ गई जिससे किसानों के उपज कम होना पाया गया इस संदर्भ में शिकायत करने पर किसी कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड जो बीज दाता है उन्हें बताया गया तो इनके द्वारा कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड के द्वारा पांच 5 वैज्ञानिक सदस्यों की टीम बनाया जांच किया गया जिसमें डॉ. सोनाली कर, डॉ. टी. पी. चंद्राकर, पी. के. सलाम,
- पी. एस. नेताम, डॉ. एस. एल. नाग, डॉ. लेखराम वर्मा सभी विशेष वैज्ञानिक अधिकारी जो कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड में पदस्थ है उनके द्वारा 1 सितम्बर 2021 को जांच दल ने इंदिरा बारानी धान का जो कृषि विभाग द्वारा दिया गया था यह जांच ग्राम पंचायत बनिया गाँव में किसानों के खेत में जाकर निरीक्षण किया गया परन्तु बीज का उल्लेख कही नही है तथा इस संबंध में पांच बिंदुओं में जांच दल द्वारा प्रतिदिन दिया गया जिसमें असमय रोपना, झींक की कमी, 40 से 45 दिन में रोपायी बताना एवं खाद्य की कमी बताया गया परंतु कृषि विभाग द्वारा दिया गया बीज के बारे में नही बताया तथा किसानों को दोषी मानकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं और किसानों को ही इस जांच में गलत बताया जा रहा । किसानों के हित के बारे में कोई नही सोच रहा ।


वर्तमान में किसानों के लिए समस्या बनी हुई है वे उनका उपज एक वर्ष का फ़सल होता है उसमें उपज कम होने से उनकी आर्थिक समस्या में बाधा उत्पन्न होने की आशंका हैं इसलिए बस्तर सांसद माननीय दीपक बैज को इस समस्या के समाधान हेतु ग्राम पंचायत के तारापुर नवाखाई जुआर भेट कार्यक्रम में आवेदन बनाकर दिया गया है अब देखना यह है कि इन किसानों की मांग कब तक पूरी होगी और अब उन्हें समस्या से कौन निजात करेगा वैसी ही किसान आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं साल में एक बार फसल होने के कारण से इन्हें अपने खेत पर निर्भर रहना पड़ता हैं ।
परंतु कृषि विश्वविद्यालय कुम्हरावंड के द्वारा दिया गया बीज से किसानों का काफी नुकसान हुआ है और उन्हें ही दोषी कहा जा रहा अब देखना यह होगा कि किसानों के हित में सरकार इनकी सहायता करता है या नहीं या फिर इसे भी ठंडे बक्शे में डाल दिया जाएगा ।


पवन कुमार नाग की खास रिपोर्ट…..






