सगरी पूजा कर माताएं रखेंगी हलषष्ठी व्रत

खरोरा:- 28 अगस्त को देश के कई हिस्सों में हल छठ पर्व मनाया जाएगा ।हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पर्व मनाने की परंपरा है ।विधि विधान से किया गया यह व्रत पूर्ण फल देने वाला और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला होता है। श्री बालाजी दरबार के पुजारी पंडित धनंजय शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी ने जन्म लिया था। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के जन्म से पूर्व शेषनाग ने बलराम के रूप में जन्म लिया था ।बलराम जी हल और मुसल धारण करते हैं इसी कारण उन्हें हलधर भी कहते हैं। पूर्वी भारत में कई जगह इस पर्व को ललही छठ कहते हैं। इस मौके पर सभी पुत्रवती महिलाएं पुत्रों की दीर्घायु और उनके उज्जवल भविष्य के लिए पूजा करती हैं और व्रत भी रखते हैं। इस व्रत में महिलाएं छोटे-छोटे मिट्टी के पात्रों या फिर पत्तों से बने हुए दोनों में पांच या सात प्रकार के भुने हुए अनाज भर्ती हैं और पूजा के बाद संतान को तिलक लगा कर उनमें वितरित किया जाता है। पूजा विधि इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं ।और सगरी खोदकर उसकी पूजा करते हैं ।सगरी के आसपास झावेरी पलाश कासा के पेड़ लगाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। हलषष्ठी का व्रत सुनती हैं इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।इस दिन गाय के दूध व दही का सेवन करना वर्जित है। इस दिन बिना हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी खाने का विशेष महत्व है। इस व्रत को पुत्रवती स्त्रियों को विशेष तौर पर करना चाहिए
लालजी वर्मा की रिपोर्ट…..



