महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर धोखा धड़ी का आरोप लगाते, कलेक्ट्रेट पहुंची स्व सहायता समूह की सैकड़ो महिलाएं

कोण्डागाँव– एक तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीजा से दो दिन पहले महिला स्व-सहायता समूहों का 12.77 करोड़ रुपए के ऋण माफी की घोषणा की है,ताकि महिलाएं आर्थिक तौर पर सुदृण हो सकें वहीं बस्तर जैसे पिछड़े इलाके में स्वसहायता समूह की महिलाओं का पैसा अधिकारियों द्वारा गबन करने की शिकायत आ रही है,मर्दापाल सेक्टर की सैकड़ो महिलाएं 7 सितंबर मंगलवार को कलेक्ट्रेट जनदर्शन आम आदमी पार्टी के मार्गदर्शन में पहुंची थी, महिलाओं का आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने उनके साथ धोखाधड़ी करते उनके पैसे आहरित करवा स्वयं ले लिया ,आरोप लगाते महिलाओं ने कहा कि उनके किये कार्य के बदले 2 साल से एक भी पैसा नही दिया गया।
मर्दापाल क्षेत्र के महिला स्व सहायता समूहों को सुपोषण अभियान के तहत की रकम धोखे से बेवकूफ बना कर राशि हड़पने की जानकारी प्रकाश में आई है,महिला बाल विकास के कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेश एवम् परियोजना अधिकारी इमरान खान द्वारा फर्जी तरीके से समूहों पे दबाव बना कर अंडे की राशि एवम् अन्य खाद्य सामग्री की राशि हड़प ने का आरोप स्व सहायता समूह की महिलाओं ने लगाया है महिलाओ ने जानकरी देते कहा कि उनको जबरन खाते में डाली गई राशि , वापस खाते से निकाल कर इमरान खान सीडीपीओ व कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेश द्वारा वापस वसूल कर लिया।साथ ही सुपोषण अभियान में केवल एक माह ही समूहों द्वारा खाद्य समग्री खरीदी की गई अन्य महीनों में अधिकारियों द्वारा स्वयं खरीदी करने की बात आई है ।
आप पार्टी के आशुतोष ने महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते कहा कि सीधे उक्त अधिकारियों द्वारा बाजार से सामग्री भेजी गई जों की समूहों ने खरीदी ही नहीं किया , समूहों से जबरन दस्तखत करवाए गए और इनको मिलने वाली राशि भी हड़प ली गई , साथ ही प्रशासन को फर्जी बिल दे कर के इन समूहों द्वारा सासन के पैसों का बंदर-बांट करने का आरोप लगाया है।
ज्ञात हो कि वर्तमान में कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेश व सीडीपीओ इमरान का तबादला अन्यत्र जिला हो चुका है ।आज दो वर्षो से समूह की महिलाओं को भुगतान नहीं हुआ है वही अधिकारियों के तबादले के बाद अब महिलाएं अपने भुगतान की राशि पाने के लिए भटकती नजर आ रही हैं अब देखने वाली बात है कि स्व सहायता समूह की महिलाओं को उनका भुगतान कब तक मिल पाता है व संबंधित दोषी अधिकारियों पर किस प्रकार की कार्यवाही की जाती है। साभार
पवन नाग की रिपोर्ट…..
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