कर्ज के बोझ में डूबता छत्तीसगढ़,
कैसे गढ़ेंगे नवा छत्तीसगढ़ ? – विष्णु लोधी

कमज़ोर आर्थिक नीति का दुष्परिणाम, भावी पीढ़ी को कर्जदार बना रही है सरकार – JCCJ
1000 करोड़ के नए कर्ज के साथ छत्तीसगढ़ में कर्ज का भार हुआ 70,000 करोड़ रुपया से अधिक।
जोगी सरकार ने लिया था मात्र 900 करोड़ रुपया कर्ज, नए राज्य में सीमित संसाधनों के बावजूद स्व जोगी ने रखी छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव।
डोंगरगढ़ – जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला अध्यक्ष ने लगातार कर्ज के बोझ में डूबते छत्तीसगढ़ में कैसे नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने ? का सवाल खड़ा करते हुए कहा यह राज्य सरकार की कमजोर आर्थिक नीति का दुष्परिणाम है कि छत्तीसगढ़ दिन प्रतिदिन कर्जदार होता जा रहा है।
विष्णु लोधी ने कहा किसी भी राज्य का चहुंमुखी विकास तभी हो सकता है जब उस राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। छत्तीसगढ़ में साधन संसाधन की कमी नहीं है, राज्य अपने बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दम पर आय का जरिया जुटा सकती है । राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्व जोगी ने कहा था छत्तीसगढ़ की माटी में महंगे खनिज संपदा का भरमार जिसका दोहन कर छत्तीसगढ़ को कर्जमुक्त कर खुशहाल छत्तीसगढ़ की स्थापना की जा सकती है परन्तु राज्य सरकार की असफल वित्तीय प्रबंधन के कारण सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है।
विष्णु लोधी ने कहा पूर्ववर्ती सरकार ने लगभग 41,000 हजार करोड़ कर्ज विरासत में छोड़ गए थे। सरकारी आंकड़ों की माने तो राज्य की भूपेश सरकार ने नवंबर 2020 की स्थिति में कुल 30 हजार 632 करोड़ रुपए का ऋण लिया है और साल 2019-20 में कर्ज के ब्याज के रूप में 4 हजार 225 करोड़ रुपए पटाएं है। 18 साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लगभग 41,000 करोड़ कर्ज लिया वहीं भूपेश सरकार आने के बाद आज की स्थिति में नए कर्ज 1000 हजार करोड़ के साथ कर्ज अब 70, 000 करोड़ रुपया से अधिक हो गया है।
विष्णु लोधी ने कहा कोरोना काल को जिम्मेदार बताते हुए राज्य सरकार ने राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून में परिवर्तन कर अपने जीएसडीपी का पांच प्रतिशत तक कर्ज ले रही है जो पहले तीन प्रतिशत निर्धारित थी। सरकार को कर्ज लेने के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून को परिवर्तन करने के बजाय आय के साधन जुटाने के लिए नीतियां और योजनाए बनानी चाहिए।
विष्णु लोधी ने कहा कर्ज हमेशा से नुकसान दायक होता है चाहे घर परिवार के लिए हो या फिर राज व्यवस्था के लिए हो जिस तेज गति से राज्य सरकार कर्ज ले रही है भविष्य में इसका खामियाजा छत्तीसगढ़ की भावी पीढ़ी को भोगना पड़ेगा क्योंकि राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा कर्ज का ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जाएगा।
राजनांदगांव से मानसिंग की रिपोर्ट….




