अमित शाह की नजर छत्तीसगढ़ की घटनाक्रम पर, नेतृत्व परिवर्तन के किसी स्थिति में 35 कांग्रेस विधायकों को बीजेपी में ला कर सरकार बनाने की तैयारी….

राहुल गांधी का सुरक्षित फैसला टीएस सिंहदेव के पक्ष में गलती से भी जाता है तो कांग्रेस में भारी टूटन होना तय
भारतीय राजनीति में समय के साथ जोड़-तोड़ की राजनीति चरम पर है। भाजपा शासनकाल में अमित शाह इस परंपरा को उस शिखर तक पहुंचा दिया, जहां बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें जीतकर आने वाली निर्वाचित पार्टियां भी चौकन्ने रहने मजबूर हैं। उन्होंने अपनी सूझबूझ और चाणक्य नीति के चलते गोवा जैसे राज्यों में अपनी सरकार बनाकर इसके उदाहरण भी दिये हैं। वहीं मध्यप्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य इसके जीवंत उदाहरण हैं। भाजपा की नजर इसके बाद सबसे पहले राजस्थान पर जा टिकी, जो आज भी समय का इंतजार कर रहा है। कोई सोचा भी नहीं था कि 90 में 70 सीटाें पर काबिज कांग्रेस की मजबूत सरकार को भी इस दौर से गुजरना पड़ेगा।
पिछले कई दिनों से छत्तीसगढ़ के सत्ता संघर्ष को लेकर जहां कांग्रेस में उथल-पुथल मचा हुआ है, वहीं भाजपा की पैनी नजर भी लगातार लगी हुई है। पिछले दिनों दिल्ली में पूरी सरकार के साथ-साथ पूरे विधायकों का मार्च करना अमित शाह के लिए एक मौके की तरह नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ में 2-4 को छोड़ दिया जाए तो कोई भी विधायक भूपेश बघेल से परे हटकर नेतृत्व स्वीकार करने तैयार नहीं है। इस बीच राहुल गांधी का सुरक्षित फैसला टीएस सिंहदेव के पक्ष में गलती से भी जाता है तो कांग्रेस में भारी टूटन होना तय है। विश्वत सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस के ऐसे 35 से भी ज्यादा विधायकों को भाजपा में प्रवेश कराकर सरकार बनाने की तैयारी चल रही है।
कहा जाता है कि बेमौसम का बरसात दैनिक दिनचार्चा को खराब कर देता है। ठीक इसी तरह से अच्छा खासा चल रही छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार को जिस तरह से अस्थिर करने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अनायास ही प्रसंग आया। उसका फायदा कांग्रेस को नहीं बल्कि सीधा भाजपा को मिल रहा है। मौके के इंतजार में रहने वाले राजनीतिक चाणक्य अमित शाह की पहली नजर छत्तीसगढ़ पर जा टिकी है।
कांग्रेस के 35 से भी ज्यादा विधायक भाजपा में जाने तैयार…?
ऐसा लग रहा उन्हें घर बैठे न्यौता मिल गया हो। गुप्त सूत्रों से इस बात की रिपोर्टिंग भी हो रही है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में कांग्रेस के 35 से भी ज्यादा विधायक भाजपा में जाने तैयार हैं। पर वे टीएस सिंहदेव को किसी भी हालत में मुख्यमंत्री के रूप में देखना नहीं चाहते। भारतीय राजनीति में यह पहला मौका है जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री ने अपने विधायकों का वो विश्वास अर्जित करने सफलता हासिल की है, जो हर सूरत में उन्हीं की नेतृत्व में विश्वास रखते हैं। शायद इस तरह के घटनाक्रम में यह पहला मौका था जब पूरे विधायक दिल्ली जाकर अपने नेता के पक्ष में हाईकामन को गुहार लगाई। बावजूद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें शांत नहीं हुई और भाजपा को इस पूरे घटनाक्रम में अपना लाभ नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के 35 से भी ज्यादा विधायक इस बात को लेकर लामबंद है कि हाईकमान इस तरह का कोई अप्रत्याशित निर्णय विधायकों के मंशा के अनुरूप लेती है तो वे पार्टी तक छोड़ने तैयार हैं। इस बात की चर्चा आज राजधानी में जोरों पर रही कि भाजपा के कुछ अंदुरूनी सूत्र इसे अंजाम देने भूमिका तैयार कर रहे हैं।
बताया जाता है कि अमित शाह ने इस बात के संकेत दे दिये हैं कि कांग्रेस के अंदर मची इस घमासान का सीधा अवसर भाजपा को लेने का समय आ गया है। बताया यह भी जा रहा है कि कांग्रेस के ऐसे विधायकों को इस बात का कोई गुरेज भी नहीं कि वे भाजपा में न जाएं।
इसके लिए इस विधायकों को अच्छा ऑफर भी दिये जाने की बात सामने आई है। जिसमें बताया जा रहा है कि इन सभी विधायकों को आगामी विधानसभा के चुनाव में भाजपा से टिकट भी दी जाएगी एवंम अधिकांशक को मंत्री भी बनाया जाएगा और शेष विधायकों को मंत्री का दर्जा देकर पूरे सम्मान के साथ सरकार में सहभागी भी बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में इन हालातों को देख लग रहा है कि कांग्रेस बड़े टूटन के कगार पर जाने वाली है। ,,,*साभार
पवन नाग की रिपोर्ट…..
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