लोक निर्माण विभाग के काम तो जानते ही हैं अगर नहीं जानते तो इस खबर को पड़ लो कैसे बिना अनुमति के हरा भरा फलदार पेड़ को आधा बली चढ़ाकर अनहोनी को आमंत्रित कर रहे है

डोंगरगांव शासन प्रशासन लगातार करोड़ों रुपए खर्च कर प्रति वर्ष वृक्षारोपण का कार्य किया जाता है जिसमें कितने पौधे जीवित बच पाते हैं कितने मरते हैं आप सभी जानते हैं कई सरकारी संस्थाओं में तो सिर्फ कागजों में ही वृक्षारोपण हो जाता है अगर पेड़ पौधे बड़े हो भी जाते हैं तो कभी विकास के नाम पर तो सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बली देना आम बात है
नगर स्थित लोक निर्माण विभाग का विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) में अनेकों प्रकार के पेड़ पौधे लगाए गए हैं यहां पर एक फलदार बेल के पेड़ जो बड़ा हो गया है और फल भी देने लग गया है लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी कर्मचारी को रास नहीं आ रहा है लगता है वहां पर न कोई विकास हो रहा और न निर्माण फिर भी बिना किसी कारणों से फलदार वृक्ष पर अनावश्यक कुल्हाड़ी चला दिया है किसी को पेड़ काटने का पता न चले करके आधे अधूरे कुल्हाड़ी चलाकर छोड़ दिया है जो कभी भी गिर सकता है लेकिन अचानक गिरने पर किसी अनहोनी होने से रोका भी नहीं जा सकता है क्योंकि जिस जगह पर पेड़ है वहां पर पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारियों का आवास है वही जानवरों का आवागमन होते रहता है कभी भी अप्रिय घटना घटित हो सकता है।

लापरवाही के कारण पीडब्ल्यूडी विभाग के क्वाटर खंडर में हो रहा है तब्दील

पीडब्ल्यूडी के क्वार्टर रेस्ट हाउस के बगल में बना हुआ है जहां पर अनेकों कर्मचारियों अधिकारियों के निवास के लिए बनाया गया है लेकिन कोई अधिकारी कर्मचारी इसमें निवास नहीं करने के कारण लाखों रुपए के बनें क्वार्टर भूत बंगला में तब्दील होते नजर आ रहे हैं यहां पर पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए क्वार्टर है लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण पूर्ण रूप से जर्जर होते नजर आ रहे हैं।

रेस्ट हाउस के सामने कब्जा
नगर के ह्रदय स्थल में स्थित रेस्टहाउस आजादी के पहले का रेस्ट हाउस है।इस रेस्टहाउस की गौरवशाली इतिहास रहा है।पिछले कुछ समय से उच्चाधिकारियो द्वारा यहाँ से ध्यान हटा लेने के कारण सब वह होने लगा जो नही होना चाहिए।आकस्मिक निरीक्षण, कार्यवाही होने का भय बन जाये तो व्यवस्था दुरुस्त होने में देर नही लगेगी।रेस्ट हाउस के सामने दीवार से लगे क्षेत्र मे फल,कपड़ा वालो ने कब्जा कर धंधा कर रहे है।बताया जाता है कि रेस्टहाउस के कर्मचारी के साठ गांठ से यह सब चल रहा है।रेस्टहाउस मे आये दिन कोई न कोई अधिकारी नेता आते रहते है।भगवान ना करे! कोई बड़ी दुर्घटना हो जाये?फिर लक़ीर पिटनेके सिवाय कुछन्हि रहेगा।
सब इंजीनियर यहां रहते नहीं
डोंगरगांव का रेस्ट हाउस जमाने से बेहतर सुविधा के लिए जाना जाता रहा है । पूर्व में पदस्थ सब इंजीनियरियो ने यहां के रेस्ट हाउस की गरिमा को बनाए रखने के कारण नाम कमा कर ही गए हैं । अनुविभाग मुख्यालय का इस रेस्ट हाउस मैं यदि कोई जिम्मेदार सब इंजीनियर निवास बनाकर ना रहे तो निश्चित ही व्यवस्था चरमराना स्वभाविक है। जवाब चतुर्थ वर्ग का कर्मचारी थोड़ी देगा। बताया जाता है कि रेस्ट हाउस पर मेंटेनेंस के नाम से आने वाले राशि का भी बंदरबांट हो रहा है साथ ही विभाग में कुछ कर्मचारी रेस्ट हाउस के कुछ जगह को अपना कब्जा कर हथिया लिए है विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस परिपेक्ष में संपूर्ण जानकारी है लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं किए जाने के कारण करोड़ों की जमीन उनके कब्जे में है।पीडब्ल्यूडी के एस डी ओ से मोबाइल में संपर्क किया गया लेकिन फोन को रिसीव नहीं किया एक ओर पीडब्ल्यूडी के संजय जागृत से संपर्क करने पर गोलमोल जवाब दिया

देवेन्द्र कुमार की रिपोर्ट——

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मिल्खा सिंह ज्ञानी

एडिटर-इंडिया007न्यूज मो.+91 98279 34086

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