आदिवासियों की भूमि पर सुमित बाजार का अवैध निर्माण

सरायपाली- कोर्ट ऑफ वर्ल्ड के तहत 1951 में राजा महाराजों के साथ ही जमीदारों के समस्त भूमि को सरकार ने निहत किया है। जो शासन की लापरवाही के कारण ऐसे भूमि का लोग बंदरबाट करते हुए झूठा लिखा पढ़ी से आदिवासियों की जमीन पर भी दबंगो के द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। ऐसे रिक्त पड़े आदिवासियों की भूमि को फर्जी लिखा पढ़ी के सहारे राजस्व अधिकारियों से मिलकर बिना कलेक्टर मंजूरी के बड़ी संख्या में लोग ऐसी भूमि को कब्जा कर रहे है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। पदमपुर रोड स्थित खसरा नंबर 678 जो पूर्व में राजस्व अभिलेख में घास भूमि दर्ज था। जिसे पूर्व तहसीलदार टी.एस महेष्वरी, पटवारी ने राजस्व अभिलेखों में परिवर्तन करते हुए, उक्त भूमि को कई भागों में बाटते हुए, घास भूमि को आदिवासी भूमि बताकर कूट रचना करते हुए, ऐसे भूमि को राजनैतिक दबाव पूर्व भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष के शाले के नाम पर इस शासकीय भूमि पर नाम दर्ज किया गया है। जिसकी जांच करने पर असलियत सामने आ सकती है। जिससे साफ जाहिर होता है, कि तहसीलदार ने 2016-17 में नियम, कानून को अंगूठा दिखाकर राजस्व कानून की धज्जियां उड़ाते हुए शासकीय भूमि को जीजा के आशीर्वाद से साले ने अपने नाम कराई है। उक्त घास, आदिवासी भूमि पर बिना किसी विभाग से अनुमति लेकर फर्जी तरीके से मॉल का निर्माण किया गया है। जबकि इस प्रकार के भवन निर्माण से पूर्व नगरपालिका को स्टाम्प की छाया प्रतिलिपी, पटवारी नकल, खसरा बी-1, पी-2, डायवर्सन की कॉपी, नामांतरण की कॉपी, नगर निवेश महासमुंद से अनापत्ति प्रमाण पत्र, नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र, एन.एच. 53/ पी.डब्लू.डी. से संबंधित प्रमाण पत्र दिए बिना नगरपालिका ने भी ऐसे घास, आदिवासी भूमि पर अवैध निर्माण करने के लिए हरि झंडी दे दी है। क्योंकि अवैध निर्माण मामला विधानसभा अध्यक्ष के साले का है। इसकी शिकायत तहसीलदार सरायपाली को दिनांक- 26/02/2017 को किया गया है। उसके बावजूद आज तक राजस्व न्यायालय के द्वारा ऐसे भूमाफियाओं पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही किया गया है। जिस कारण सैयां भय कोटवार तो डर काहे का कहावत सही साबित हुई है और उक्त घास, आदिवासी भूमि पर अवैध निर्माण करते हुए एक बहुत बड़ा मॉल का निर्माण किया गया है। जिसे रायपुर के विजय (कानू) सुमित बाजार के मालिक को सुमित बाजार खोलने के लिए लाखों-लाखों रुपया किराया में दिया गया है। माले मुफ्त तो दिले बाहर नगर क्षेत्र में सुमित बाजार में इस प्रकार से लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां लाट का कपड़ा लाकर विक्रय किया जाता है, घटिया खाद्य सामग्री विक्रय किया जाता है। जो लोग एक बार लेने के बाद दुबारा नहीं जाते है। इस कारण क्षेत्र के लोग कहते है कि रायपुर से आकर नगर में लोगों को बेवकूफ बना रहे है। बेवकूफ जिंदा पढ़े-लिखे लोग भूखे नहीं मरेंगे साथ ही सुमित बाज़ार में जितने भी मजदूर काम करते है, उन मजदूरों को मजदूरी कम दिया जाता है। जिसमे अधिकांश मजदूर स्थानीय न होकर बाहर के है। ऐसे भूमिफियाओं पर जिनका दबदबा भाजपा शासन में था और वर्तमान में कांग्रेस शासन है। तो क्या कोई राजस्व अधिकारी ऐसे फर्जीवाड़ा की जांच साधुवाद से करते हुए नियमानुसार कार्यवाही कर सकता है क्या? कही ऐसा तो नहीं कि वर्तमान राजस्व मंत्री ही इनका रिश्तेदार जयसिंह अग्रवाल जो ऐसे अतिक्रमणकारियों पर कार्यवाही को रुकवा रहा है? इस कर के छत्तीसगढ़ के लोगो से इस संपादक का निवेदन है कि आने वाले समय मे भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर तीसरे विकल्प की तलाश अभी से करे, अन्यथा इस प्रकार के लोग सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के जल, जमीन और जंगल पर कब्जा करते रहेंगे।
चिराग की चिंगारी बजरंग लाल सेन




