बच्चों के अनुपात में नहीं है शिक्षक: कुशल सिंह राजपूत

डोंगरगांव : प्राथमिक शाला दीवान झिटिया 2 शिक्षकों के भरोसे 5 कक्षाएं। पढ़ाई हो रही प्रभावित । विकास खंड शिक्षा अधिकारी को नहीं है। कोई मतलब। डोंगरगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत दीवान झिटिया के प्राथमिक में सिर्फ 2 शिक्षक हैं। और 5 कक्षाएं हैं। पढ़ाई कैसे होती होगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। आज शिक्षा का स्तर इसीलिए लगातार गिरता जा रहा हैं ।क्योंकि विभाग और सरकार की लापरवाही से लगातार शिक्षा का स्तर कमजोर हो रहा है । क्षेत्रीय विधायक डोंगरगांव ने नियम विरुद्ध अपने गांव में हाई स्कूल खुलवा लिए और अपने गांव में शिक्षकों को भरपूर मात्रा में रखे हुए हैं। परंतु अन्य स्कूलों में हाल बेहाल है। कुछ आत्मानंद स्कूल बनाने से स्कूलों का भला नहीं होने वाला। अगर सरकार में हिम्मत है तो सभी स्कूलों को आत्मानंद की तर्ज पर। सभी स्कूलों में अच्छे भवन, अच्छे मैदान, और कक्षावार शिक्षक दिए जाएं। अन्य विभाग के अधिकारियों को स्कूलों में पढ़ाने के लिए लगाना। अन्य विभागों के काम में भी लापरवाही । एवं शिक्षा को प्रयोगशाला बनाना कहां तक उचित है। सुबह 7:00 बजे से ऑनलाइन कोचिंग में बच्चों को स्कूल में बुलाना 10वीं और 12वीं की बच्चियों को किसके भरोसे बुलाया जा रहा है। अगर उनके साथ कुछ अनहोनी होती है। उसकी जवाबदारी किसकी होगी। कुछ स्कूलों को आप वीआईपी सुविधा दे रहे हैं। और बाकी स्कूलों के साथ आप सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। क्या यही है छत्तीसगढ़ शिक्षा माॅडल। छत्तीसगढ़ के मुखिया कहते कि हमने दिल्ली से अच्छे स्कूल बनाए हैं । क्या यही है दिल्ली से अच्छे स्कूल । शिक्षा मंत्री को शिक्षा का श भी पता नही है। शिक्षा मंत्री स्कूलों में कभी दौरे में नहीं जाते। ना ही वह स्कूलों का हाल जानते। उनको यह भी पता नहीं कि छत्तीसगढ़ के स्कूलों का क्या हाल है। शिक्षा मंत्री को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है। नए आत्मानंद स्कूल के कभी छत उड़ जा रहे हैं । तो किसी स्कूल के बनते ही छत टपकने लग रहे हैं। ना तो शिक्षा मंत्री शिक्षकों को प्रमोशन दे पा रहे हैं। ना शिक्षकों को महंगाई भत्ता दे पा रहे हैं। ना शिक्षकों की भर्ती कर पा रहे हैं। नाही शिक्षकों के अनुरूप शिक्षको की पदस्थापना कर पा रहे हैं। नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए । शिक्षा मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुखिया द्वारा सिर्फ और सिर्फ तबादला फैक्ट्री खोल कर के पैसा कमाने का रास्ता बनाया जा रहा है। परंतु छत्तीसगढ़ में कुल 60 लाख बच्चों में 3 लाख शिक्षक होने के बावजूद सरकार बच्चों के अनुपात पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पा रही है । जबकि 20 बच्चो पर 1 शिक्षक दिया जा सकता है। यह घोर लापरवाही है ।एवं बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसी व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए नहीं तो किया जाएगा आंदोलन।
देवेन्द्र कुमार देवांगन***




